Feziya khan

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धीरे धीरे से भाग --- 12




दो दिन के बाद वो सब अपने घर निकल गयें थे मम्मी से पूछा की ये लोग यहाँ क्यों आए थे तो उन्होंने मुझे तिरछी नज़रो से देख कर बोली,, क्यों वो लोग क्या आप से इज़्ज़त लेकर आएगे की मैडम आज आप के घर आना चाहते है तो क्या हम आ सकते है,,,,

आप इतना गुस्सा क्यों हो रही है मैंने तो बस सीधा सा सवाल पूछा था पता नहीं आप आज क्या खाकर बैठी है बात बात पर तलवार निकल लेती है नहीं जानना मुझे क्यों आए थे,,,,


ये कह कर दीप्ती रसोई से बाहर आ कर अपने कमरे मे चली गयी,,,,

पता नहीं कभी कभी मम्मी को क्या हो जाता है मेरे साथ ऐसे ही बिखर जाती है इसमें मेरी कोई गलती हो या ना हो उन्हें बस सुननाने से मतलब होता था,,,,,

कभी उन्होंने मेरे मन की पूछी ही नहीं बस आई और सूना देती है फरमान हर बार,, मै क्या चाहती हूँ क्या सोचती हूँ मेरे एहसास मेरी ख्वाइशओ से उन्हें कोई मतलब नहीं होता था उसे तो कभी ना सुनने की आदत ही नहीं थी जो बोला है वो हो जाना चाहिए अगर नहीं किया तो मेरी खैर ही नहीं होती थी यूँ कहो की वो दीप्ती की ज़िन्दगी मे वो एक हिटलर से ज्यादा नहीं थी ,,,,,,


दीप्ती पापा से तो अपने मन की बोल भी देती थी पर मम्मी ना बाबा ना उनसे तो कुछ भी बोलने से पहले वो सौ बार सोचना होता था की बोले की नहीं,,,,,,,


एक छोटा सा सवाल ही तो पूछा था कौन सी उनकी संपत्ति को अपने नाम करा रही थी जो सुनते ही मुझ पर इतना भड़क उठी,,,,,,,


 मां तो अपने बच्चों की बिन बोले ही उनके मन की बात समझ जाती है पता नहीं मेरी मां कैसी है जो अपने ही बेटी के मन के एहसासों को नहीं जान पाती थी उसकी मर्जी क्या है उन्हें नहीं पता,,,

 वो मुझ से कभी नहीं पूछती की अगर मुझसे कोई गलती हुई है तो वो जान कर हुई है या अनजाने मे,,, हुई है तो क्यों हुई है,,, अगर कोई बाहर वाला भी आ जाता ना उनसे बोलने तुम्हारी लड़की ने ये किया है तो वो मुझसे ये नहीं पूछती कभी की ये तूने क्यों किया क्या बोल रही है ये बस सीधा गुस्से मे जो आए वो सुना देती थी,,,,,,

आँखो मे आँसू लिए दीप्ती अपने कमरे मे चली जाती है,,,


 कॉलेज मे कॉम्पीटिशन का जोर शौर से प्रचार किया जा रहा था अगले वीक से जो थे दीप्ती के कुछ दोस्तों ने भी इस मे हिस्सा लिया था 


रिया ने दीप्ती का नाम सॉन्ग के लिए दे दिया था दीप्ती का मन नहीं था इस कॉम्पीटिशन मे भाग लेने का ज़ब दिल और दिमाग़ साथ ना दे तो किसी भी चीज का मन नहीं करता चाहे वो किसने भी अच्छा क्यों ना हो,,,,,, 

रिया दीप्ती को अच्छे से समझती थी उससे दीप्ती के अंदर का हाल नहीं छुपा था इसलिए वो चाहती थी की कुछ दिन तो वो इन सब झमेले से दूर रहे,,,,

उसके बहुत समझाने पर दीप्ती रिया को माना नहीं कर पाई और तैयार हो गयी इस कॉम्पीटिशन के लिए,,,,,


दीप्ती ने एक गाने की तैयारी कर ली थी उसे डर लग रहा था पता नहीं वो इस गाने के साथ इंसाफ कर पाऊँगी या नहीं अगर गाने की जो डिमांड मे वो पूरी नहीं कर पाई तो उसे खुद को बहुत भूरा फील होगा पर क्या करती रिया को नाराज भी नहीं कर सकती थी और ना ही खुद को ख़ुश,,,,,,


खैर जैसे तैसे सब हो गया दीप्ती ने खुद को तैयार किया और स्टेज पर जा कर खड़ी हो गयी अपनी आँखे बंद की और गाना शुरू किया,,,,,,,



अपने करम की कर अदाएं..
यारा.. यारा.. यारा..
मुझको इरादे दे, कसमें दे,वादे दे
मेरी दुआओं के इशारों को सहारे दे
दिल को ठिकाने दे,

नए बहाने दे ख़्वाबों की बारिशों
को मौसम के पैमाने दे
अपने करम की कर अदाएं कर दे
इधर भी तू निगाहें
सुन रहा है ना तू, रो रहा हूँ मैं
सुन रहा है ना तू, क्यूँ रो रहा हूँ मैं
सुन रहा है ना तू, रो रहा हूँ मैं
सुन रहा है ना तू, क्यूँ रो रहा हूँ मैं

मंजिलें रुसवा हैं, खोया है रास्ता आये ले जाए,इतनी सी इल्तेजा ये मेरी ज़मानत है
तू मेरी अमानत है हाँ..
अपने करम की कर अदाएं कर दे
इधर भी तू निगाहें
सुन रहा है ना तू, रो रहा हूँ मैं
सुन रहा है ना तू, क्यूँ रो रहा हूँ मैं
वक़्त भी ठहरा है, कैसे क्यूँ ये हुआ
काश तू ऐसे आये, जैसे कोई दुआ तू
रूह की राहत है तू मेरी इबादत है..
अपने करम की कर अदाएं कर दे
इधर भी तू निगाहें सुन रहा है ना तू,
रो रहा हूँ मैं सुन रहा है ना तू,
क्यूँ रो रहा हूँ मैं.. सुन रहा है ना तू,
रो रहा हूँ मैं सुन रहा है ना तू,
क्यूँ रो रहा हूँ मैं.. यारा.. 


गाना इतना अच्छा हुआ था सभी को बहुत पसंद दीप्ती को भी अंदर से बहुत ही अच्छी फिलिंग आई,,,,,,

ये कॉम्पीटिशन मे जीत गयी रिया सब से ज्यादा ख़ुश थी उसे ख़ुश देख कर दीप्ती भी ख़ुश हो गयी थी,,,,


रिया के साथ साथ मोहन भी बहुत ख़ुश था मेरी इस जीत पर मोहन आया और दीप्ती को  बोला वाह यर क्या गाया है ना "तुसी तो छा गयें" यार,,,,,,

मोहन इतना ज्यादा खुश था की उसे पता ही नहीं चला की वो ख़ुशी ख़ुशी मे दीप्ती को क्या बोल दिया जिस की दीप्ती ने कभी कल्पना भी नहीं की थी,,,,,,



क्या दीप्ती खुद को संभाल पायेगी मोहन ने ऐसा क्या बोला था दीप्ती को जो वो सोच भी नहीं सकती थी मोहन और दीप्ती की कहानी क्या मोड़ लेगी आगे वीर फिर कभी दीप्ती की ज़िन्दगी मे नहीं आएगा जानने के लिए जुड़े रहे,,,,






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